मुझे स्त्री देख जितना सता लो

 

मुझे स्त्री देख जितना सता लो
रूला लो,अत्याचार कर लो
उफ्फ भी ना करूँगी 

हमेशा समर्पण का भाव रखती हूँ 
त्याग की देवी कहलाती हूँ 
मर्यादा में रह कर सब शांत रखती
हूँ 

ताकि तुम खुद पर और अपने 
पुरुषार्थ पर गर्व कर सको
पौरुष के अंहकार में हर सीमा
लांघते हो
तुम अपने अभिमान को बचाने
के लिये कुचल देते हो मेरा
स्वाभिमान 

घमंड में चूर भुल जाते हो नारी
का सम्मान 
डिस्पोजल समझ उतार फेंकते 
हो स्त्री का स्वाभिमान 
मैं व्यर्थ नहीं मेरे बीना तुम्हारा 
कोई अर्थ नही 
मेरे मोल से ही तुम अनमोल हो



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