मै उस जमाने का हूं !!!
मैं उस जमाने का हूँ जब दहेज में घड़ी, रेडियो और साइकिल मिल जाने पर लोग ...फिर बहुओं को जलाते नहीं थे बच्चे स्कूलों के नतीजे आने पर आत्महत्या नहीं करते थे बल्कि ... स्कूल में मास्टर जी और घर में पिताजी, उन्हें बेतहासा पीट दिया करते थे बच्चे चौदह-पन्द्रह साल तक बच्चे ही रहा करते थे तब मानवाधिकार कम लोग ही जानते थे ! मैं उस जमाने का हूँ जब कुँए का पानी गर्मियों में ठंढा और सर्दियों में गरम होता था घरों में फ्रिज नहीं मटके और 'दुधहांड़ी' होती थी दही तब सफेद नहीं हल्का ललक्षों हुआ करता था सर्दियों में कोल्हू गड़ते ही ताज़े गुड़ की महक....अहा ! लगता था धरती ने आसमान को खुश करने के लिए अभी अभी 'बसंदर' किया हो अम्मा गन्ने के रस में चावल डालकर 'रस्यावर' बना लेती थी आम की बगिया तो थी पर 'माज़ा' नहीं 'राब' का शरबत तो था पर कोल्डड्रिंक्स नहीं पैसे बहुत कम थे पर जिंदगी बहुत मीठी ! मैं उस जमाने का हूँ जब गर्मियां आज जैसी ही होती ...