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जब कोई स्त्री एक बार कामेच्छा में घिर जाती है तो ....

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 जब कोई स्त्री एक बार कामेच्छा में घिर जाती है तो वह अपने जीवन की प्राकृतिक और आवश्यक प्रक्रिया  सामना करती है। जिसमे  मन, शरीर और आत्मा एकजुट होते हैं। कामेच्छा या यौन इच्छा मानवीय अनुभवों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमारे संबंधों और प्रतिस्पर्धा के साथ जुड़ा हुआ है। यह  मानव स्वभाव का एक महत्वपूर्ण और प्राकृतिक अंग है जो हमें आपसी आकर्षण और भावनाओं का अनुभव करने की क्षमता प्रदान करता है। यह हमारे संबंधों, संप्रेम, और संघर्ष में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे स्वीकार करना और इसे समझना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण और स्वाभाविक हिस्सा है। कामेच्छा के साथ होने वाली इस अवस्था में हमारे शरीर में बदलाव होता है। हमारी हृदय दर की बढ़ोतरी होती है, श्वसन गति तेज हो जाती है और शरीर के अन्य हिस्सों की रक्षा शक्ति बढ़ती है। यह मानसिक और शारीरिक आनंद की एक अद्वितीय अनुभव है जो हमें पूर्णता की ओर आकर्षित करता है। इस अवस्था में, हम अपने शरीर की आग शान्त करने के लिए तनाव और चिंता को दूर करने के लिए संबंध ढूंढने की कोशिश करते हैं। हम पार्टनर के साथ संबंध ढूंढते हैं जो हमारी इच्छाओ...

मुझे स्त्री देख जितना सता लो

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  मुझे स्त्री देख जितना सता लो रूला लो,अत्याचार कर लो उफ्फ भी ना करूँगी  हमेशा समर्पण का भाव रखती हूँ  त्याग की देवी कहलाती हूँ  मर्यादा में रह कर सब शांत रखती हूँ  ताकि तुम खुद पर और अपने  पुरुषार्थ पर गर्व कर सको पौरुष के अंहकार में हर सीमा लांघते हो तुम अपने अभिमान को बचाने के लिये कुचल देते हो मेरा स्वाभिमान  घमंड में चूर भुल जाते हो नारी का सम्मान  डिस्पोजल समझ उतार फेंकते  हो स्त्री का स्वाभिमान  मैं व्यर्थ नहीं मेरे बीना तुम्हारा  कोई अर्थ नही  मेरे मोल से ही तुम अनमोल हो

मै उस जमाने का हूं !!!

 मैं उस जमाने का हूँ  जब  दहेज में घड़ी, रेडियो और साइकिल  मिल जाने पर लोग ...फिर  बहुओं को जलाते नहीं थे  बच्चे  स्कूलों के नतीजे आने पर  आत्महत्या नहीं करते थे  बल्कि ... स्कूल में मास्टर जी  और घर में पिताजी, उन्हें बेतहासा पीट दिया करते थे बच्चे चौदह-पन्द्रह साल तक  बच्चे ही रहा करते थे  तब  मानवाधिकार कम लोग ही जानते थे ! मैं उस जमाने का हूँ  जब  कुँए का पानी  गर्मियों में ठंढा और सर्दियों में गरम होता था  घरों में फ्रिज नहीं मटके और 'दुधहांड़ी' होती थी  दही तब सफेद नहीं  हल्का ललक्षों हुआ करता था  सर्दियों में कोल्हू गड़ते ही ताज़े गुड़ की महक....अहा !  लगता था धरती ने आसमान को खुश करने के लिए  अभी अभी 'बसंदर' किया हो  अम्मा  गन्ने के रस में चावल डालकर 'रस्यावर' बना लेती थी  आम की बगिया तो थी पर 'माज़ा' नहीं  'राब' का शरबत तो था  पर कोल्डड्रिंक्स नहीं पैसे बहुत कम थे पर जिंदगी बहुत मीठी ! मैं उस जमाने का हूँ  जब  गर्मियां आज जैसी ही होती ...
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   स्त्री प्रेम की आशा में... देह सौंपती है पुरूष देह के लोभ में... प्रेम करता है प्रेम प्रकृति है वासना विक्रति है 🙏🙏🙏

उसमें अनगिनत संभावनाएं है, उसे मत रोको... उड़ने दो उसे...!!!

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 #नारी उसमें अनगिनत संभावनाएं है,  उसे मत रोको... उड़ने दो उसे,  इस आकाश में ही तो बसेरा है उसका। उसे बहने दो न... नदियां से वो ये हुनर सीख कर आई है। अरे ! ड़ोर से कटी पतंग है वो,  उसकी ना जात, ना धर्म,  ना ही कोई करीबी जो उसके संग मांझे से कटकर, यूँ उड़ जाने का हौसला रखता हो। उसे अकेला ही तय करना है ये सफर, अब वो अलग है तो अलग ही सही, तुम क्यों बहती धारा को  काटने की नाक़ाम कोशिश में हो, तुम्हारी छोटी सी गागर में,  पूरा समुद्र समा पायेगा क्या? बिना मांझे की कटी पतंग को  कैसे कोई उलझा पायेगा अपनी ड़ोर में? बड़ी हठी और अल्हड़ है, शायद वो अपनी मर्ज़ी से ही  किसी रोज़ किसी छत पर थककर आ गिरे, पर फिलहाल उसे इस विश्राम की कोई इच्छा नही। उसे नदी सा कल-कल करते बहना हैं,  खामोश चार दीवारी में रहना उसे आता ही नही। उसे बढ़ना है... एक विशाल पेड़ की तरह, जिसपे हर दिन नई पत्तियां आएगी। जिस पर कई रंग-बिरंगी चिड़ियाएं बसेरा पाएगी। फिर उन्ही चिड़ियाओं संग वो पूरा आकाश नापेगी। उसे आता है मित्रता बढ़ाना,  क्योकि वो आज की नारी हैं। अधिक जानकारी के लिए #womenpower #g...

क्या आप जीवन में संघर्ष कर रहे हैं?

 क्या आप जानकारी रखते हैं  आपका एक साथी हैं, एक प्यारा बच्चा है और ज्यादातर चीजें इन दिनों आसानी से नहीं चल रही हैं।  आप उदास महसूस नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप जल्दी ही चिढ़ गए हैं, थोड़ा तनावग्रस्त और चिंतित हैं।  आपका जीवनसाथी उस स्थिति को महसूस करता है और आपसे इस बारे में बात करता है।  आप समस्याओं को यह कहते हुए दूर कर देते हैं कि वे मौजूद नहीं हैं।  क्या आप काम में ज्यादा व्यस्त रहते  हैं।  आपके लिए कई बड़े फैसले किए जाते हैं और आप कुछ कर्मचारियों को बताने वाले हैं कि वे अपनी नौकरी खो सकते हैं।  यह आपकी बात नहीं है लेकिन फिर भी आप पूरी स्थिति से असहज महसूस कर रहे हैं।  समय उन बुरी खबरों-वार्तालापों के करीब आता है।  आप सोच रहे हैं कि क्या आपको नौकरियों के नुकसान को रोकने के लिए कुछ करना चाहिए था।  आपको लगता है कि आपने सबसे अच्छा किया लेकिन आपके मन में अभी भी संदेह है।  आप पूरी स्थिति को फिर से देखते हैं।  आप इसके बारे में घर पर बात करते हैं और आप कुछ दोस्तों से सलाह भी लेते हैं।  वे आपको बताते हैं कि आपको ज्यादा...